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Tuesday, 10 October 2017

विडम्बना :दिखावे के रंगरोगन से त्रेता के राम कलियुग में उतारने की तैयारी .....

आज निजी काम से अयोध्या के सरयू नदी किनारे घाट पर गया हुआ था ,अचानक मेरी नज़र महिला स्नान गृह की तरफ गयी जहा पर कुछ मजदूर महिला स्नान गृह में रंगरोगन कर रहे थे । मेरे ख्याल से स्नान गृह उद्घाटन के बाद अब उसमें रंगरोगन होता दिखा ... इतना देखते ही हर्षोउल्लसित होकर मैंने वहां मौजूद मजदूर से पूछ ही लिया कि आख़िर क्यों यहाँ पर रंगरोगन का कार्य चल रहा है ,तभी उसमे से किसी सज्जन ने कहा ....आप नहीं जानते 18 अक्टूबर को छोटी दिवाली में प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ अपने कैबिनेट मंत्रीमंडल के साथ अयोध्या पधार रहे है ।

उत्सुकता बढ़ी की सीएम योगी के आने पर ही सफाई व्यवस्था क्यों ... तो एक सज्जन ने कहा दिन के 365 दिन सप्तपुरियों तीर्थो की अयोध्या को गन्दगी ,संक्रमण ,जगह जगह टूटी सड़को से गुजरना पड़ता है लेकिन जैसे ही कोई नेता या सरकार का अधिकारी अयोध्या पहुँचता है यहाँ सफाई गति पकड लेती है । लेकिन अयोध्या के चार प्रमुख त्योहारों राम नवमी दशहरा स्नान व् परिक्रमा में श्रद्धालुओं राम भक्तो को गन्दगी की ढेर से ही निकलना पड़ता है । तो किसी दूसरे सज्जन ने सहजता से मुस्कुराते हुए कहा कि करोडो की धनराशि जो आवंटित होती है उसकी एक झलक दिखाने के लिए सांसद विधायक और सरकारी अफसर रंगरोगन के साथ टूटी सड़को में मरहम भर देते है जिससे अयोध्या का वो ज़ख्म प्रदेश के मुखिया ना देख सके जो यहाँ का आमजनमानस देख रहा है । यह सुनकर काफी निराश हुई।


दिखावे के रंगरोगन पर चर्चा हो ही रही थी कि एक महाशय जोकि अन्य जनपद के प्रतीत हो रहे उन्होंने कहा अयोध्या के प्रवेश द्वार पर तुलसी दास जी का एक दोहा है ...जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी  अर्थात जिसकी जैसी दृष्टि होती है, उसे वैसी ही मूरत दिखाई देती है ....जी हां सदियों से माँ सरयू नदी किनारे बसी अयोध्या आज भी अपने अस्तित्व को तलाश रही है ।

श्री राम के नाम पर राजनीती कर रहे राजनीतिक दल वोटो को भुनाने के लिए अयोध्या के भविष्य को गर्त में झोंकते जा रहे है। क्योंकि केंद्र प्रदेश की सत्ता में काबिज राजनितिक दलों ने अयोध्या को महज़ अयोध्यावासियों के दिलो में बसे श्री राम की आस्था पर सत्ता हासिल तो की लेकिन अयोध्या के साथ सौतेला व्यवहार करने में ज़रा सी भी कसर नहीं छोड़ी । तुलसी दास जी के दोहे पर गौर करे तो राजनितिक दलों को राम सत्ता की सीढ़ी का रास्ता के सिवा कुछ ना दिखे ।

क्षणिक भर के लिए वहां मौजूद श्रद्धालुओं से वार्तालाप कर अयोध्या के विकास को लेकर मन पसीझ गया कि कैसे राम नामी जप की माला जपकर राजनितिक दल हो या सरकारी अमला महज अपनी जेब भरने में लगा है । आखिर क्या ऐसे होगी अयोध्या में रामराज्य की स्थापना , जहाँ पर भूखे मगरमच्छ की तरह घात लगाए राजनितिक दल के लोग बैठे है जोकि अयोध्या के विकास की परियोजनाओं पर बंदरबाट करके 1 दिन के रंगरोगन से अयोध्या को विश्वपटल पर दिखाने का सपना दिखाते है ।


आभार

अभिषेक सावन्त श्रीवास्तव

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