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Monday, 2 October 2017

चुटकी : सरकारी विज्ञापनों को देखकर भागेंगे चिकुनगुनिया डेंगू के मच्छर ....

डेंगू चिकुनगुनिया से पीड़ित मरीजों के लिए खुशखबरी है , अखबारों में सरकारी विज्ञापनों को देखकर अब संक्रमण फैला रहे मच्छर जल्द ही नौ दो ग्यारह होने वाले है । देश के पीएम की फोटो और डेंगू चिकनगुनिया से कैसे बचाव किया जाए इसके लिए अखबारों में विज्ञापनों के जरिये भरपूर बताया जा रहा है कि कैसे इस बीमारी से निजात पाया जा सकता है । मालूम पड़ता है कि विज्ञापनों पर करोडो खर्च कर रही सरकार उपचार न करके विज्ञापनों के जरिये संक्रमण से मुक्त होने का बीड़ा उठाने वाली है |





 स्वच्छता अभियान हो या फिर डेंगू चिकुनगुनिया जैसी बीमारी से लड़ाई , समाचारपत्रों सोशल मीडिया और टीवी में सरकारी विज्ञापनों की भरमार देखी जा सकती है । सोशल मीडिया के माध्यम से डेंगू से बचाओ अभियान में जितनी तेजी दिखती है अगर अस्पतालों में मरीजो के लिए उपचार पर सरकार धनराशी खर्च करती तो शायद घातक बीमारी को कम किया जा सकता | धरातल पर डेंगू चिकनगुनिया के मच्छरो से निजात दिलाने के लिए किया जाता तो हर साल आकड़ो में बढ़ोतरी ना होती | 

वही बात अगर आंकड़ो के आधार पर की जाए तो केंद्र हो या फिर प्रदेश की सरकारे अखबारों टीवी चैनलो में करोडो अरबो रुपये विज्ञापन में खर्च कर देती है । बावजूद इसके डेंगू चिकनगुनिया के मरीजो के लिए मुक़म्मल चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध नहीं हो पाती और पीड़ितों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है । अब भी समय है सरकारों को सचेत होकर चिकित्सालय में रिक्त पड़ी डॉक्टरों की जगह को भरना चाहिए । चिकित्सालय दवा भण्डार केंद्र में समुचित दवाओं पर ध्यान देना चाहिए । क्योंकि विज्ञापनों से सिर्फ लोगो को जागरूक किया जा सकता है जोकि जरुरी भी है लेकिन इसके साथ साथ जिलाचिकित्सालय , अर्धसरकारी चिकित्सालय व् निजी अस्पतालों में भी सरकारों को ध्यान देना चाहिए । क्योंकि वोटो की अपेक्षा जिनसे रखी जा रही है वह माकूल उपचार न मिल पाने के कारण डेंगू चिकनगुनिया का शिकार हो रहे है । जिसका खामियाजा उनके परिवारों को भुगतना पड़ता है । मेरे स्वयं के विचार से अगर करोडो अरबो के विज्ञापन की जगह पीड़ितों को मच्छरदानी बाँट दी जाती तो प्रति वर्ष मारने वाले रोगियों की संख्या में वृद्धि ना होती । लेकिन अफ़सोस जुमले लुभावने वादों के सिवा जनता को कुछ नहीं मिलता । 


( लेखक के अपने विचार )

आभार

अभिषेक सावन्त श्रीवास्तव 

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